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I see you are the branches" - a spiritual truth

 

🌿 "मैं दाखलता हूं, तुम डालियां हो" – एक आत्मिक सच्चाई 🌿

"मैं सच्ची दाखलता हूं और मेरा पिता किसान है।" – यूहन्ना 15:1

यीशु मसीह ने एक बेहद महत्वपूर्ण आत्मिक सच्चाई हमारे सामने रखी – वह दाखलता हैं, हम उसकी डालियां हैं, और परमेश्वर पिता वह किसान हैं जो हमें फलवंत देखने की इच्छा रखते हैं।

🍇 फल लाने की बुलाहट

यीशु ने कहा कि जो डाली उसमें बनी रहती है, वह बहुत फल लाती है। यानी, एक सच्चा विश्वासी वही है जो मसीह में बना रहता है – प्रार्थना में, वचन में, और आत्मा के फलों में। यह सिर्फ दिखावे की बात नहीं, बल्कि एक गवाही (testimony) है जो हमारे जीवन से झलकनी चाहिए।

आत्मिक फल क्या हैं?

  • प्रेम

  • आनंद

  • शांति

  • धीरज

  • कृपा

  • भलाई

  • विश्वास

  • नम्रता

  • संयम (गलातियों 5:22-23)

इन फलों के बिना कोई भी मसीही जीवन अधूरा है।

✂️ छंटाई की प्रक्रिया – एक जरूरी दर्द

यीशु ने स्पष्ट कहा कि जो डाली फल लाती है, उसे पिता और अधिक फलवंत बनाने के लिए छांटता है। यह छंटाई कई बार दर्दनाक होती है – जब जीवन में तकलीफें आती हैं, जब प्रार्थनाएं तुरंत पूरी नहीं होतीं, या जब कुछ रिश्ते टूट जाते हैं।

आप सोचते होंगे,
"मैं तो प्रार्थना करता हूं, उपवास करता हूं, वचन पढ़ता हूं – फिर भी तकलीफें क्यों?"
उत्तर है: क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे आज को नहीं, तुम्हारे भविष्य के फल को देख रहा है।

जैसे एक किसान अंगूर की बेल की छंटाई करता है ताकि रोग न लगे और गुणवत्ता बेहतर हो, वैसे ही परमेश्वर हमारे जीवन की छंटाई करता है ताकि हम आत्मिक रूप से और अधिक गहरे, स्थिर और फलदायी बनें।

🔥 परमेश्वर की महिमा और तुम्हारी गवाही

यीशु ने कहा,
"मेरे पिता की महिमा इसी से होती है कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब तुम मेरे चेले ठहरो।" (यूहन्ना 15:8)

परमेश्वर चाहता है कि तुम्हारे जीवन में केवल धार्मिकता न हो, बल्कि गवाही हो, उद्धार हो, चंगाई हो, और आत्मिक प्रभाव हो। ताकि जब लोग तुम्हें देखें, तो मसीह को जानें।

🙌 छंटाई में परमेश्वर का हाथ देखें, शैतान का नहीं

जब तुम्हारे जीवन में कुछ छूटे, या जब परमेश्वर कुछ लोगों को तुम्हारी जिंदगी से हटा दे – दुख मत मनाओ। यह शैतान नहीं, बल्कि वह किसान परमेश्वर है जो तुम्हारी आत्मा की खेती कर रहा है।

अगर परमेश्वर तुम्हारी प्रार्थना का उत्तर नहीं दे रहा, शायद वह तुम्हें एक बेहतर फल की ओर ले जा रहा है।

🛐 प्रतिक्रिया – एक प्रार्थना

"हे परमेश्वर, मुझे छांट जब तू चाहता है, ताकि मैं बहुत सा आत्मिक फल लाऊं। मुझे तैयार कर, नम्र बना, और विश्वास में मजबूत बना। मुझे अपने वचन में स्थिर रख और मुझे तेरी महिमा के लिए प्रयोग कर। यीशु के नाम में, आमीन।"


📌 निष्कर्ष

जीवन की छंटाई एक दर्दनाक लेकिन सुंदर प्रक्रिया है। अगर आप आज किसी संघर्ष से गुजर रहे हैं, याद रखें – आप एक डाल हैं, और आपका परमेश्वर एक परिपूर्ण किसान है। वह छांट रहा है, काट नहीं रहा।

यीशु मसीह में बने रहिए, फल लाइए – और परमेश्वर की महिमा को अपने जीवन से प्रकट कीजिए।


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💬 नीचे कमेंट में लिखिए – किस तरह परमेश्वर ने आपकी जिंदगी में छंटाई की और आपको फलवंत बनाया?

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