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✝️ परमेश्वर की प्रेजेंस तक पहुँचना आसान नहीं – एक आत्मिक लड़ाई - Special Message by Apostle Ankur Yoseph Narula

 ✝️ परमेश्वर की प्रेजेंस तक पहुँचना आसान नहीं – एक आत्मिक लड़ाई


“उसने भीड़ में से आकर मेरे वस्त्रों को छुआ है…” – मरकुस 5:27

🔥 प्रस्तावना:

हर इंसान परमेश्वर की उपस्थिति चाहता है, उसकी चंगाई, छुटकारा और आशीष चाहता है। लेकिन क्या हम इसके लिए तैयार हैं जो कीमत परमेश्वर की उपस्थिति तक पहुँचने के लिए चुकानी पड़ती है? आज का यह सन्देश उसी सत्य पर प्रकाश डालता है – कि परमेश्वर को छूना आसान नहीं होता।


📖 1. यीशु मसीह तक पहुँचना कभी भी आसान नहीं था

यीशु के समय की दो घटनाएँ हमें गहराई से सिखाती हैं:

🔸 12 साल से लहू बहने वाली स्त्री (मरकुस 5:25–34)

  • यह स्त्री बीमारी, कमजोरी और समाज से बहिष्कृत थी।

  • बाइबल कहती है उसने भीड़ को चीरकर यीशु को छुआ।

  • व्यवस्था के अनुसार वह अशुद्ध थी, छूना मना था – पर उसने अपनी जान की भी परवाह नहीं की।

👉 उसका एक ही लक्ष्य था: "मैं बस यीशु को छू लूं…"

🔸 ज़क्कई का संघर्ष (लूका 19:1–10)

  • ज़क्कई एक अधिकारी था, उसकी सामाजिक स्थिति ऊँची थी।

  • लेकिन उसने यीशु को देखने के लिए अपनी प्रतिष्ठा को पीछे रखा और एक पेड़ पर चढ़ गया।

👉 उसने दिखाया कि यीशु को देखने की भूख में इंसान खुद को मिटा देता है।


⚔️ 2. जहां परमेश्वर की उपस्थिति होती है, वहां एक लड़ाई जरूर होती है

  • परमेश्वर की प्रेजेंस में आने से पहले शैतान प्रयास करता है कि आप रुक जाएं:

    • बीमारी,

    • मानसिक थकावट,

    • पारिवारिक कलह,

    • वित्तीय तंगी,

    • या फिर मौसम ही क्यों न हो – गर्मी, बारिश या सर्दी!

शैतान जानता है कि अगर आप परमेश्वर की उपस्थिति में पहुँच गए, तो आपकी ज़िंदगी बदल जाएगी।


🙏 3. आशीष पाने के लिए समर्पण चाहिए, बहाने नहीं

आज भी बहुत से मसीही हैं जो एक जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन उनमें से कोई-कोई ही चंगाई पाता है – क्यों?

  • क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की लड़ाई के आगे घुटने नहीं टेके,

  • उन्होंने परमेश्वर के आगे घुटने टेके,

  • प्रेयर छोड़ी नहीं, चर्च मिस नहीं किया, रोजे कायम रखे।

"विश्वास के साथ उठाए गए कदम ही परमेश्वर के स्पर्श को आकर्षित करते हैं।"


💡 4. आपकी अगली आशीष उस कीमत पर निर्भर है, जो आप आज चुकाते हैं

  • कोई गर्मी में बैठने को तैयार है,

  • कोई बारिश में भी सभा में आता है,

  • कोई थकावट में भी वचन सुनता है।

यह सब दर्शाता है कि हम किस हद तक परमेश्वर की तलाश में हैं।

👉 अगर आपके पास बहाना है – मौसम, मूड या मन – तो आपके पास चंगाई शायद नहीं आएगी।


✝️ निष्कर्ष:

"यीशु को छूना आसान नहीं है। लेकिन जो छूता है, वह बदल जाता है!"

आज यह प्रश्न खुद से पूछें:

  • क्या मैं सिर्फ चाहता हूं परमेश्वर की उपस्थिति?

  • या फिर उसके लिए कुछ कदम भी उठाता हूं?

  • क्या मैं बहाने ढूंढता हूं या कीमत चुकाने को तैयार हूं?


📣 अंतिम संदेश:

जो लोग परमेश्वर की उपस्थिति की भूख रखते हैं, वो आज ही कुछ व्यवहारिक कदम उठाएं:

  • नियमित प्रेयर,

  • वचन का अध्ययन,

  • Fellowship से जुड़े रहना,

  • अपने संघर्षों में विश्वास बनाए रखना।

"आज जो लड़ाई आप लड़ रहे हैं, वही कल की गवाही बनेगी।"

हालेलुया! आमीन।

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