✝️ नया मसीही सिर्फ एक कदम पीछे है अपनी आशीषों से
1. प्रस्तावना
हर इंसान अपने जीवन में आशीषें चाहता है—शांति, स्वास्थ्य, परिवार में मेल-जोल, आर्थिक स्थिरता और आत्मिक संतोष। लेकिन कई बार हमें लगता है कि हम उन आशीषों से बहुत दूर हैं।
वास्तव में, बाइबिल हमें यह सिखाती है कि हम अपनी आशीषों से बहुत दूर नहीं हैं—बल्कि सिर्फ एक कदम पीछे हैं।
यूहन्ना 10:10 – “चोर केवल चोरी करने, घात करने और नाश करने को आता है; मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं और बहुतायत से पाएं।”
यीशु ने स्पष्ट किया कि आशीषें हमारी पहुंच से बाहर नहीं हैं। ज़रूरत सिर्फ उस एक कदम की है—वह कदम विश्वास का, आज्ञाकारिता का और समर्पण का।
2. नया मसीही कौन है?
जब कोई व्यक्ति यीशु को अपने व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करता है, तो वह नया मसीही कहलाता है। इसका अर्थ है—पुराना जीवन पीछे छोड़कर नए जीवन की शुरुआत करना।
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2 कुरिन्थियों 5:17 – “इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है; पुराना बीत गया, देखो सब नया हो गया।”
नया मसीही होना सिर्फ नाम बदलना नहीं है, बल्कि जीवन की दिशा बदलना है।
3. आशीषों से दूरी का कारण
अक्सर नए मसीही अनुभव करते हैं कि उन्होंने मसीह को मान लिया है, फिर भी जीवन में आशीषें देर से आ रही हैं। क्यों?
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अधूरा विश्वास – वे सोचते हैं कि शायद परमेश्वर करेगा, लेकिन निश्चित भरोसा नहीं रखते।
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प्रार्थना की कमी – बिना संवाद के संबंध जीवित नहीं रह सकता।
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दुनियावी प्रलोभन – पाप और आकर्षण हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं।
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धैर्य की कमी – तुरंत परिणाम चाहने के कारण लोग बीच रास्ते छोड़ देते हैं।
4. “सिर्फ एक कदम” का महत्व
परमेश्वर की योजना कभी भी अधूरी नहीं होती। अक्सर आशीषें हमारे सामने खड़ी होती हैं, लेकिन हमें सिर्फ एक और कदम उठाना होता है।
बाइबिल उदाहरण
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इस्राएली लोग प्रतिज्ञा किए हुए देश के बिल्कुल पास थे, लेकिन विश्वास की कमी से 40 साल जंगल में भटकते रहे।
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पतरस ने पानी पर चलना शुरू किया, लेकिन संदेह के कारण डूबने लगा। यदि वह विश्वास में एक कदम और आगे बढ़ाता तो अद्भुत गवाही बनती।
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नआमान को भविष्यवक्ता एलीशा ने कहा कि वह यरदन नदी में सात बार डुबकी लगाए। यदि वह छः बार में रुक जाता तो चंगा नहीं होता। सातवीं डुबकी यानी सिर्फ एक कदम ने उसका भाग्य बदल दिया।
5. नए मसीही के लिए आशीषों तक पहुंचने के सात कदम
1. विश्वास का कदम
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हर वचन को सत्य मानना।
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इब्रानियों 11:6 – “विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है।”
2. प्रार्थना का कदम
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निरंतर प्रार्थना ही आत्मा को मजबूत करती है।
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“निरंतर प्रार्थना करते रहो।” (1 थिस्सलुनीकियों 5:17)
3. धन्यवाद का कदम
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कठिनाई में भी परमेश्वर का धन्यवाद करना।
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धन्यवाद हमारे भीतर सकारात्मकता और आत्मिक शक्ति भरता है।
4. आज्ञाकारिता का कदम
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वचन को सिर्फ सुनना नहीं, बल्कि करना।
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याकूब 1:22 – “वचन के करनेवाले बनो, न कि केवल सुननेवाले।”
5. संगति का कदम
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चर्च और विश्वासियों के साथ जुड़े रहना।
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“जहां दो या तीन मेरे नाम से इकट्ठे होते हैं, वहां मैं उनके बीच होता हूं।” (मत्ती 18:20)
6. त्याग का कदम
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परमेश्वर के लिए कुछ छोड़ना—समय, पाप, स्वार्थ।
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त्याग के बिना समर्पण अधूरा है।
7. धैर्य का कदम
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समय पर परमेश्वर आशीष देगा।
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गलातियों 6:9 – “हम भलाई करने में हिम्मत न हारें; क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।”
6. व्यावहारिक जीवन में लागू करना
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यदि आप बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं—एक और कदम मेहनत और प्रार्थना का उठाइए।
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यदि बीमारी से लड़ रहे हैं—एक और कदम विश्वास का बढ़ाइए।
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यदि परिवारिक टूटन है—एक और कदम क्षमा और मेल-मिलाप का बढ़ाइए।
7. आधुनिक गवाही का संदेश
कई लोग गवाही देते हैं कि जब वे हार मानने ही वाले थे, तभी उन्होंने प्रार्थना में एक कदम और आगे बढ़ाया—और वहीं से परमेश्वर ने चमत्कार कर दिया।
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किसी ने कर्ज से निकलने के लिए एक कदम और मेहनत किया।
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किसी ने परिवार में टूटन के बीच एक कदम और क्षमा किया।
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किसी ने बीमारी में एक कदम और विश्वास रखा।
हर बार उस छोटे कदम ने जीवन बदल दिया।
8. नया मसीही और आत्मिक परिपक्वता
नया मसीही शुरुआत में बच्चा होता है, लेकिन उसे आत्मिक रूप से परिपक्व होना है। परिपक्वता का मार्ग छोटे-छोटे कदमों से होकर ही गुजरता है।
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दूध से रोटी की ओर,
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बच्चे से जवान की ओर,
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जवान से परिपक्व विश्वासयोग्य की ओर।
9. निष्कर्ष
प्रिय भाइयों और बहनों, आपकी आशीषें दूर नहीं हैं। वे आपके दरवाज़े पर हैं। ज़रूरत है सिर्फ एक और कदम उठाने की।
✨ याद रखिए:
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नया मसीही सिर्फ एक कदम पीछे है अपनी आशीषों से।
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वह कदम विश्वास का, आज्ञाकारिता का और समर्पण का हो सकता है।
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परमेश्वर ने कहा – “मेरा धर्मी विश्वास से जीएगा।” (रोमियों 1:17)
आज आप किस स्थिति में हैं? चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न हो, हार मत मानिए। क्योंकि हो सकता है आपकी चमत्कारिक आशीष बस एक कदम दूर ही हो।
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