तू बस मेरी उपस्थिति में रहा कर – एक आत्मिक रहस्य
"अगर आप परमेश्वर को समझ गए, अगर आपमें परमेश्वर के वचनों की समझ आ गई – तो जीवन आसान हो जाएगा।"
यह कोई कल्पना नहीं, यह परमेश्वर की योजना है – एक ऐसा जीवन जिसमें संघर्ष के बीच भी विजय, आँसुओं में भी शांति, और टूटी परिस्थिति में भी आशा हो।
क्या जीवन सच में संघर्ष है?
शैतान ने इस झूठ को हमारे दिलों में बो दिया है कि "Life is a struggle" – लेकिन क्या आपने कभी किसी पति-पत्नी को यह कहते सुना है:
“आओ, दो-तीन बच्चे पैदा करते हैं ताकि वो बीमार रहें, दर-दर भटकें, संघर्ष करें…”?
नहीं, क्योंकि हर माता-पिता अपने बच्चों को आशीष देना चाहते हैं।
तो क्या हमारा स्वर्गीय पिता ऐसा नहीं चाहेगा?
परमेश्वर बुरे में से भी भलाई निकालता है
बाइबल कहती है —
"यदि तुम बुरे होकर अपने बच्चों को भली वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों नहीं देगा?" (मत्ती 7:11)
जब यह सत्य हमारे "खाने" में – हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है – तब हमारी सोच बदल जाती है।
अब हम अपनी आंखों से भला और बुरा नहीं देखते — हम जानते हैं कि "सब बातें मिलकर भलाई को उत्पन्न करती हैं उनके लिए जो परमेश्वर से प्रेम रखते हैं।" (रोमियों 8:28)
शैतान का पहला झूठ – तू परमेश्वर के समान हो जाएगा
हवा पहले से परमेश्वर के स्वरूप में बनाई गई थी, फिर भी शैतान ने कहा, "यह फल खा ले, तू परमेश्वर के समान हो जाएगी।"
उसने उसे भरमाया और उसकी सोच बदल दी।
आज भी शैतान हमसे यही कहता है — कि तुम अभी पूरे नहीं हो, कुछ और चाहिए, और वह हमें परमेश्वर की उपस्थिति से दूर ले जाता है।
यीशु मसीह का बलिदान – प्रेम का चरम रूप
जब यीशु क्रूस पर जा रहे थे, तो स्त्रियाँ उनके लिए रो रही थीं।
परमेश्वर ने मुड़कर कहा —
"मेरे लिए मत रोओ, पर अपने और अपने बच्चों के लिए रोओ।" (लूका 23:28)
क्यों?
क्योंकि यीशु जानता था कि कुछ सालों में यरूशलेम पर भारी विपत्ति आने वाली है — और वही लोग जिन्होंने कहा था:
"इसका लहू हम पर और हमारी संतान पर हो",
वे सब रोमी सेनाओं के द्वारा मारे गए।
यह सत्यानाश उस वचन का प्रतिफल था।
आपकी पहली बुलाहट – परमेश्वर के साथ समय बिताना
आप डॉक्टर हैं, टीचर हैं, व्यापारी हैं – यह सब दूसरी बुलाहटें हैं।
पहली बुलाहट है — परमेश्वर के साथ संगति करना, उसकी उपस्थिति में रहना, उसके वचनों में चलना।
यही वो बुलाहट है जिससे परमेश्वर आपकी हर दूसरी ज़रूरत का समाधान करता है।
माफ करना — कमज़ोरी नहीं, आत्मिक ताकत है
जब आप अपने दुश्मनों को माफ करते हैं, तो आप परमेश्वर को मौका देते हैं उनके साथ न्याय करने का।
जब आप माफ करते हैं, तो आप स्वतंत्र होते हैं, और शांति पाते हैं।
बाइबल कहती है, "जब तू अपने दुश्मन को माफ करता है, तू उसके सिर पर अंगारे रखता है।"
बदलती नहीं परमेश्वर की योजना – बदलती है हमारी पात्रता
परमेश्वर दाऊद से कहता है —
"मैंने तुझे बहुत कुछ देने का विचार किया था, पर अब मैंने अपना मन बदल लिया।"
क्यों? क्योंकि दाऊद पाप में गिरा।
आपकी आशीष परमेश्वर की इच्छा पर नहीं, आपकी पात्रता पर निर्भर करती है।
आप कितना ले सकते हैं?
क्या आप उसके साथ वफादार हैं?
क्या आप पहले जैसे समर्पण में बने हुए हैं?
परमेश्वर का मकसद – एक सशक्त, स्थिर जीवन
परमेश्वर आपका घर रेत पर नहीं, चट्टान पर बनाना चाहता है।
परमेश्वर चाहता है कि आप जीवन की आंधियों और तूफानों में स्थिर खड़े रहें, क्योंकि आप उसके साथ हैं।
बाइबल का सार – परमेश्वर की उपस्थिति ही जीवन है
आदम को हर शाम परमेश्वर की उपस्थिति में जीने के लिए बनाया गया था।
वो नंगा हुआ, शर्मिंदा हुआ, क्योंकि उसने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया।
परमेश्वर ने एक भेड़ की बलि दी – और उसी के चमड़े से आदम का नंगापन ढका।
वो भेड़ यीशु मसीह की भविष्यवाणी थी।
अब क्या करें?
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अपने जीवन में भला-बुरा देखना बंद करें।
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सब कुछ परमेश्वर के हाथों में सौंप दें।
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पवित्रता में चलें, वचनों पर स्थिर रहें।
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प्रार्थना और उपवास में समय बिताएं।
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माफ करें, आशीष दें, भरोसा रखें।
"तू बस मेरी उपस्थिति में रहा कर…"
यही वो रहस्य है जो जीवन की हर परीक्षा में विजय देता है।
🙏 आपका जीवन आशीषित हो
✝️ आपकी आत्मा स्थिर और मजबूत बनी रहे
🔥 आप परमेश्वर की उपस्थिति में चलें, और लोग आपके गवाह बनें
यीशु के नाम में, आमीन।
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