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यीशु मसीह – वह वकील जो आपके लिए खड़ा है - Jesus Christ – The Advocate Who Stands for You

 “यीशु मसीह – वह वकील जो आपके लिए खड़ा है”

(Jesus Christ – The Advocate Who Stands for You)


  ब्लॉग विभाजन योजना:

🕊️ भाग 1: “कलीसिया जो अधोलोक पर विजय पाएगी”

  • मत्ती 16:18 का अर्थ — “अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे”

  • परमेश्वर की शक्ति से आगे बढ़ती कलीसिया

  • भय नहीं, विश्वास की कलीसिया

✝️ भाग 2: “यीशु मसीह – दाहिनी ओर बैठे, पर आपके लिए खड़े होते हैं”

  • स्वर्ग में यीशु का स्थान: परमेश्वर की दाहिनी ओर

  • स्तिफनुस की गवाही – जब यीशु उसके लिए खड़े हुए

  • यीशु आपके लिए वकील हैं, आपका केस लड़ते हैं

💖 भाग 3: “परमेश्वर की योजना – श्राप से आशीष की ओर”

  • आदम से लेकर यीशु तक — मानवता की यात्रा

  • पाप के कारण आई मेहनत, श्राप, और कष्ट

  • यीशु मसीह के लहू से टूटा श्राप

  • विश्वासियों की नई स्थिति – “पाप से पहले वाली परिपूर्णता में लौटना”


✝️ भाग 1: कलीसिया जो अधोलोक पर विजय पाएगी

(The Church That Shall Overcome the Gates of Hell)

📖 मुख्य वचन:

“और मैं तुझसे कहता हूँ कि तू पतरस है, और इस चट्टान पर मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा; और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।”
— मत्ती 16:18


🌿 परिचय: कलीसिया की सच्ची पहचान

यीशु मसीह ने जब यह वचन कहा, तब वह केवल इमारतों या सभाओं की बात नहीं कर रहे थे।
वह उन लोगों की बात कर रहे थे — जो उनके लहू से धुले हैं, जो आत्मा से भरे हैं, और जो उनके नाम में चल रहे हैं।

कलीसिया कोई संगठन नहीं, बल्कि जीवित लोगों का समूह है, जो स्वर्ग के राज्य की महिमा को पृथ्वी पर प्रकट करता है।
इस कलीसिया का निर्माण किसी मनुष्य ने नहीं किया — स्वयं मसीह ने किया है।


🔥 1️⃣ कलीसिया – युद्ध में खड़ी सेना है

जब यीशु ने कहा कि “अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे,”
तो उन्होंने यह नहीं कहा कि कलीसिया पीछे हटेगी — बल्कि उन्होंने कहा,
“कलीसिया आगे बढ़ेगी, और नर्क के द्वार भी उसका सामना नहीं कर पाएंगे।”

कलीसिया कोई डरपोक समूह नहीं है —
वह युद्ध में खड़ी सेना है, जो आत्मिक अंधकार पर विजय पाने के लिए अभिषिक्त है।

“क्योंकि हमारा मल्लयुद्ध मांस और लोहू से नहीं, परन्तु प्रधानताओं, अधिकारियों, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और आकाश में होनेवाली दुष्ट आत्माओं से है।”
— इफिसियों 6:12


💪 2️⃣ परमेश्वर की शक्ति से चलने वाली कलीसिया

सच्ची कलीसिया अपनी शक्ति मनुष्य से नहीं लेती।
वह शक्ति पवित्र आत्मा से लेती है।
जब पवित्र आत्मा उतरता है, तो डर साहस में बदल जाता है, और दुर्बलता सामर्थ में।

प्रेरितों के काम 2 में जब पवित्र आत्मा उतरा, तो डरकर बंद कमरे में बैठे चेले साहस के साथ प्रचारक बन गए।
वही आत्मा आज भी कलीसिया में कार्य कर रहा है।

Apostle Ankur Narula जी अक्सर कहते हैं —

“कलीसिया एक भवन नहीं, एक आंदोलन है —
एक ऐसी आत्मिक शक्ति जो नरक के हर हमले को पीछे धकेल देती है।”


🕊️ 3️⃣ अधोलोक के फाटक क्या हैं?

“अधोलोक के फाटक” का अर्थ है —
शैतान के योजनाएँ, आत्मिक बंधन, श्राप, बीमारी, पाप, और हर वह चीज़ जो परमेश्वर की योजना को रोकना चाहती है।

परन्तु यीशु ने वचन दिया है —
“वे उस पर प्रबल न होंगे।”
मतलब — चाहे नर्क की कितनी भी शक्ति क्यों न लगे,
कलीसिया को पराजित नहीं कर सकती!

क्योंकि कलीसिया का सिर स्वयं मसीह है, और जब सिर जीवित है, शरीर कभी नहीं मर सकता।


⚔️ 4️⃣ कलीसिया को दी गई अधिकार की चाबी

मत्ती 16:19 में यीशु आगे कहते हैं —

“मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा, वह स्वर्ग में बँधा जाएगा, और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुल जाएगा।”

यह कोई धार्मिक बात नहीं, बल्कि आत्मिक अधिकार की घोषणा है।
हर सच्चा विश्वासी — जब यीशु के नाम में प्रार्थना करता है —
तो स्वर्गीय कुंजी के साथ कार्य करता है।

कलीसिया को यह अधिकार दिया गया है कि वह रोगों को बाँध दे,
श्रापों को तोड़ दे,
और आशीष के द्वार खोल दे।


5️⃣ डर नहीं, विजय का आत्मा

आज की दुनिया भय से भरी है —
भविष्य का डर, बीमारी का डर, असफलता का डर...
पर याद रखें — कलीसिया डर से नहीं, विश्वास से चलती है।

“क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की आत्मा नहीं, परन्तु सामर्थ, प्रेम और संयम की आत्मा दी है।”
— 2 तीमुथियुस 1:7

जब कलीसिया डरना छोड़ देती है और विश्वास में खड़ी हो जाती है,
तो नर्क के द्वार टूट जाते हैं।


🌈 निष्कर्ष: विजयी कलीसिया

कलीसिया किसी हारने वाले समूह का नाम नहीं,
बल्कि विजेताओं की सभा (Assembly of Victors) है।

यीशु ने वचन दिया है —

“मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा।”
इसका मतलब — उसे कोई मनुष्य, कोई शक्ति, कोई शैतानी योजना गिरा नहीं सकती।

प्रिय जनो,
अगर आप मसीह में हैं —
तो आप केवल एक सदस्य नहीं, बल्कि विजयी सेना का हिस्सा हैं।
आपके भीतर वह आत्मा है जो मृतकों को जिलाती है, और जो हर अधोलोक पर विजय पाने वाली कलीसिया का हिस्सा है।


✝️ भाग 2: “यीशु मसीह – दाहिनी ओर बैठे, पर आपके लिए खड़े होते हैं”

(Jesus Christ — Seated at the Right Hand, Yet Standing for You)


📖 मुख्य वचन:

“पर वह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर, स्वर्ग की ओर टकटकी लगाए देख रहा था, और परमेश्वर की महिमा और यीशु को परमेश्वर के दाहिने खड़े हुए देखा।”
— प्रेरितों के काम 7:55


🔹 परिचय:

कलीसिया के पहले शहीद स्तिफनुस (Stephen) को जब पत्थरों से मारा जा रहा था,
तब स्वर्ग खुला और उसने एक अद्भुत दर्शन देखा —
यीशु मसीह खड़े हुए हैं!

यह वही यीशु हैं जिनके बारे में बाइबल कहती है कि वे
“परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठे हैं।”
(मरकुस 16:19, रोमियों 8:34, इब्रानियों 1:3)

परंतु जब उनका सेवक पीड़ा में था,
जब एक विश्वासयोग्य गवाह मरने वाला था —
यीशु बैठे नहीं रहे, वे उसके लिए खड़े हो गए।


🔹 1️⃣ यीशु मसीह का बैठना — पूर्ण कार्य का प्रतीक

जब यीशु ने क्रूस पर कहा, “पूरा हुआ” (यूहन्ना 19:30),
तो उन्होंने मानवता के उद्धार का कार्य समाप्त कर दिया।
फिर वे स्वर्ग में जाकर परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गए,
जिसका अर्थ है — उनका कार्य सिद्ध हो गया।

कोई और बलिदान, कोई और कीमत नहीं बची थी।
अब वे “वकील” के रूप में हमारे लिए परमेश्वर के सामने मध्यस्थता करते हैं।

“हमारा एक वकील पिता के पास है — यीशु मसीह धर्मी।” (1 यूहन्ना 2:1)


🔹 2️⃣ यीशु मसीह का खड़ा होना — करुणा और समर्थन का प्रतीक

जब स्तिफनुस को मारा जा रहा था,
तब स्वर्ग खुला और उसने देखा —
“यीशु खड़े हुए हैं।”

वह किसी राजा की तरह सिंहासन पर नहीं बैठे रहे,
बल्कि एक वफादार वकील और दयालु उद्धारकर्ता की तरह खड़े हुए।

यह इस बात का चिन्ह था कि —

“मैं तुझे नहीं छोड़ूँगा, न तज दूँगा।” (इब्रानियों 13:5)

यीशु हर उस व्यक्ति के लिए खड़े होते हैं
जो सच्चाई के लिए खड़ा होता है।
जब आप अपने विश्वास में स्थिर रहते हैं,
तो स्वर्ग में आपका उद्धारकर्ता भी आपके लिए खड़ा हो जाता है।


🔹 3️⃣ मसीह आपका वकील है

यीशु केवल उद्धारकर्ता ही नहीं, बल्कि आपका प्रतिनिधि भी है।
वह पिता के सामने आपके लिए प्रार्थना करता है।
जब शैतान आपको दोषी ठहराने की कोशिश करता है,
तो यीशु कहता है —

“मैंने इसका दाम अपने लहू से चुका दिया है।”

रोमियों 8:34 कहता है —

“मसीह यीशु जो मरा, वरन् जी भी उठा; जो परमेश्वर के दाहिने है, और हमारे लिये बिनती भी करता है।”

हर दिन, हर प्रार्थना में, जब आप संघर्ष करते हैं,
यीशु मसीह आपके लिए पिता के सामने बोलते हैं।


🔹 4️⃣ स्वर्ग में खड़ा यीशु – प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण

स्तिफनुस ने जब यह दर्शन देखा,
तो उसके चेहरे पर एक स्वर्गीय चमक थी (प्रेरितों के काम 6:15)।
क्योंकि उसने महसूस किया — वह अकेला नहीं है।

आप भी जब दुख, अस्वीकृति या विरोध में खड़े होते हैं,
तब यीशु भी आपके लिए खड़े होते हैं।
वह आपका दर्द देखता है, आपकी प्रार्थना सुनता है,
और अपने प्रेम से आपको संभालता है।

“यदि परमेश्वर हमारे पक्ष में है, तो कौन हमारे विरोध में?” (रोमियों 8:31)


🔹 5️⃣ व्यावहारिक संदेश – जब आप खड़े होते हैं, यीशु भी खड़े होते हैं

  • जब आप सच्चाई के लिए खड़े होते हैं, यीशु आपके लिए खड़े होते हैं।

  • जब आप प्रलोभन का सामना करते हैं, वह आपकी सहायता करता है।

  • जब आप अकेले पड़ जाते हैं, वह कहता है — “मैं तेरे साथ हूँ।”

  • जब संसार आपको ठुकराता है, यीशु आपको गले लगाता है।

वह आज भी जीवित है,
वह केवल बैठा नहीं है — वह सक्रिय रूप से आपके जीवन में काम कर रहा है।


🙌 निष्कर्ष:

यीशु मसीह स्वर्ग में सिंहासन पर बैठे हैं,
परंतु जब उनका कोई सेवक विश्वास में खड़ा होता है,
तो वह भी अपने सिंहासन से उठकर खड़ा हो जाता है।

यह प्रेम की, दया की, और समर्थन की सबसे गहरी तस्वीर है।
आपका यीशु दूर नहीं — वह आपके बहुत करीब है।
वह आपकी ओर देखता है और कहता है —

“मत डर, मैं तेरे साथ हूँ।”


 

✝️ भाग 3: “परमेश्वर की योजना – श्राप से आशीष की ओर”

(God’s Plan – From Curse to Blessing)


📖 मुख्य वचन:

“मसीह ने हमारे लिये शापित बनकर हमें व्यवस्था के शाप से छुड़ाया; क्योंकि लिखा है, ‘जो कोई काठ पर लटकाया गया है, वह शापित है।’”
— गलातियों 3:13


🔹 परिचय:

परमेश्वर ने जब मनुष्य की सृष्टि की,
तो उसने उसे अपनी समानता में बनाया — पवित्र, शुद्ध और आशीषित।
एडन का बाग एक ऐसा स्थान था जहाँ न दर्द था, न बीमारी, न मृत्यु।
मनुष्य हर दिन परमेश्वर की संगति का आनंद लेता था।

परंतु जब पाप संसार में आया,
तो उस पाप ने आशीष को श्राप में बदल दिया।
धरती कांटे और झाड़ियाँ उगाने लगी,
मेहनत भारी हो गई,
और मृत्यु मनुष्य का अंत बन गई।

पर परमेश्वर ने उस क्षण से ही एक योजना बनाई —
मनुष्य को फिर से आशीष की स्थिति में लाने की।
और वह योजना थी — यीशु मसीह।


🔹 1️⃣ आदम के पतन से श्राप की शुरुआत

एडन में जब आदम और हव्वा ने निषिद्ध फल खाया,
तो उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया।
और परिणामस्वरूप परमेश्वर ने कहा —

“धरती तेरे कारण शापित हुई; तू जीवन भर दु:ख के साथ उससे आहार पाएगा।”
— उत्पत्ति 3:17

यह वही क्षण था जब
मनुष्य की आत्मा मरी,
उसका शरीर नाशमान हुआ,
और उसका भविष्य अंधकारमय बन गया।

पाप ने केवल व्यक्ति को नहीं,
बल्कि पूरी सृष्टि को प्रभावित किया।


🔹 2️⃣ परमेश्वर की योजना – उद्धार का वचन

परमेश्वर ने आदम को दंडित किया, परंतु निराश नहीं किया।
उन्होंने उसी अध्याय में पहला उद्धार का वचन दिया:

“तेरा वंश सर्प का सिर कुचल देगा।” (उत्पत्ति 3:15)

यह पहला भविष्यवचन था मसीह यीशु के आने का।
यानी एक दिन एक ऐसा व्यक्ति आएगा
जो सर्प यानी शैतान के सिर को कुचल देगा
और मनुष्य को फिर से आशीषित बना देगा।


🔹 3️⃣ क्रूस – श्राप से आशीष की सीमा रेखा

जब यीशु मसीह क्रूस पर लटकाए गए,
तो उन्होंने सारी मानवता का श्राप अपने ऊपर ले लिया।
कांटों का ताज केवल अपमान का प्रतीक नहीं था —
वह धरती के शाप का चिन्ह था, जिसे यीशु ने अपने सिर पर धारण किया।

जब उनके लहू की बूँदें गिरीं,
तो उस लहू ने श्रापित धरती को भी पवित्र कर दिया।
इसलिए गलातियों 3:14 में लिखा है —

“कि मसीह यीशु में अब्राहम की आशीष अन्यजातियों तक पहुँचे।”

अब हर वह व्यक्ति जो यीशु मसीह पर विश्वास करता है,
वह श्राप से निकलकर आशीष के क्षेत्र में प्रवेश करता है।


🔹 4️⃣ आशीष का जीवन – मसीह में नई पहचान

यीशु मसीह में हमें केवल पापों की क्षमा नहीं,
बल्कि एक नई पहचान मिली है।

“जो मसीह में है, वह नई सृष्टि है; पुरानी बातें बीत गईं, देखो सब कुछ नया हो गया।” (2 कुरिन्थियों 5:17)

अब हम दंड के अधीन नहीं,
बल्कि कृपा के अधीन हैं।
हम दास नहीं, बल्कि पुत्र हैं।
हम अंधकार में नहीं, बल्कि ज्योति में हैं।

यीशु मसीह के लहू ने हमारी कहानी बदल दी —
श्राप से आशीष, हानि से लाभ, मृत्यु से जीवन।


🔹 5️⃣ आज का संदेश – आशीष में चलना सीखिए

परमेश्वर ने आपको केवल आशीष देने के लिए नहीं,
बल्कि आपको आशीष का माध्यम बनाने के लिए बुलाया है।

  • यदि पहले श्राप ने आपके परिवार को बाँधा था — अब यीशु में स्वतंत्रता है।

  • यदि पहले गरीबी का बंधन था — अब मसीह में भरपूरता है।

  • यदि पहले डर और असफलता थी — अब आत्मिक अधिकार और विजय है।

मसीह में चलना मतलब है —
हर दिन आशीष की सच्चाई को स्वीकार करना और उस पर चलना।


🙌 निष्कर्ष:

परमेश्वर ने आदम में मनुष्य को बनाया,
परंतु यीशु में उसे फिर से नया बनाया।
जहाँ आदम ने श्राप लाया,
वहीं यीशु ने आशीष दी।

आज यदि आप मसीह में विश्वास करते हैं,
तो आपकी पुरानी श्रापित स्थिति समाप्त हो गई है।
अब आप आशीष का पात्र, कृपा के वारिस और स्वर्ग के नागरिक हैं।

“मैं आया कि वे जीवन पाएँ, और बहुतायत से पाएँ।” — यूहन्ना 10:10

 


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