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💰 Sermon: Discipline of Finance | वित्तीय अनुशासन का रहस्य

 

💰 Sermon: Discipline of Finance | वित्तीय अनुशासन का रहस्य

📖 मुख्य वचन:

“जो थोड़ा विश्वासयोग्य है, वह बहुत में भी विश्वासयोग्य है; और जो थोड़ा अन्यायी है, वह बहुत में भी अन्यायी है।”
— लूका 16:10


🌿 प्रस्तावना (Introduction)

प्रिय भाइयों और बहनों,
परमेश्वर चाहता है कि उसके बच्चे आशीषित जीवन जिएँ — आत्मिक, शारीरिक और वित्तीय रूप से।
लेकिन कई बार लोग सोचते हैं कि धन (Money) या आर्थिक समृद्धि आत्मिक नहीं है।
सत्य यह है कि धन स्वयं बुरा नहीं है, पर धन का अनुशासनहीन उपयोग आत्मा को नष्ट कर देता है।

Apostle Ankur Narula जी सिखाते हैं कि —

“यदि आप अपने धन में परमेश्वर को पहला स्थान देंगे, तो परमेश्वर आपके हर क्षेत्र में प्रथम स्थान लेगा।”


💎 1️⃣ परमेश्वर का सिद्धांत – विश्वासयोग्यता छोटी बातों में

यीशु ने कहा — जो थोड़े में विश्वासयोग्य है, वह बहुत में भी होगा।
परमेश्वर किसी व्यक्ति को बड़ा तब बनाता है जब वह छोटे में ईमानदार रहता है।

🔹 जब आप अपने पैसों का सही उपयोग करते हैं —
🔹 जब आप दूसरों को देने में उदार रहते हैं —
🔹 जब आप दशमांश (Tithe) और भेंट (Offering) परमेश्वर को देते हैं —

तब आप दिखाते हैं कि आप “विश्वासयोग्य प्रबंधक (Faithful Steward)” हैं।


💰 2️⃣ वित्त का अनुशासन – आत्मिक जीवन का हिस्सा है

कई विश्वासी आत्मिक तो हैं, लेकिन वित्तीय रूप से अव्यवस्थित हैं।
परमेश्वर नहीं चाहता कि आप कर्ज़ और चिंता में जिएँ, बल्कि आशीष और व्यवस्था में चलें।

Apostle Narula जी कहते हैं —

“अनुशासन हर आशीष का द्वार है। यदि आप अपने वित्त में अनुशासित हैं, तो परमेश्वर आपको और अधिक सौंपेगा।”

वित्तीय अनुशासन का अर्थ है:
✅ बजट बनाना
✅ अनावश्यक खर्च रोकना
✅ दशमांश और भेंट को प्राथमिकता देना
✅ हर आशीष में परमेश्वर को धन्यवाद देना


🌾 3️⃣ दशमांश और भेंट – परमेश्वर की अर्थव्यवस्था में आपका बीज

📖 मलाकी 3:10

“संपूर्ण दशमांश भंडार में लाओ, ताकि मेरे भवन में भोजन हो, और अब इस बात में मुझे परखो...”

दशमांश देना सिर्फ कर्तव्य नहीं — यह आदर (Honor) है।
जब आप अपनी आमदनी का भाग प्रभु को समर्पित करते हैं, तो आप वित्तीय अनुशासन की जड़ में विश्वास का बीज बोते हैं।

जो व्यक्ति दशमांश देता है, वह कहता है —

“हे प्रभु, तू मेरे धन का स्वामी है, मैं केवल तेरे आशीष का प्रबंधक हूँ।”


🔥 4️⃣ अनुशासित व्यक्ति आशीष को संभाल सकता है

परमेश्वर हर किसी को आशीष देना चाहता है —
परंतु वह केवल उन्हीं को अधिक देता है जो संभाल सकते हैं।

अगर परमेश्वर आपको 1000 रुपये देता है और आप उन्हें व्यर्थ खर्च करते हैं,
तो वह आपको 10,000 रुपये क्यों सौंपेगा?

अनुशासन हमें तैयार करता है — अधिक जिम्मेदारी के लिए।
Apostle Narula कहते हैं —

“यदि आप अपने वित्त को नियंत्रित नहीं करेंगे, तो वित्त आपको नियंत्रित करेगा।”


🌤️ 5️⃣ परमेश्वर चाहता है कि आप समृद्ध बनें, पर आत्मिक रूप से स्थिर रहें

वित्तीय आशीष का उद्देश्य है — राज्य (Kingdom) का विस्तार।
परमेश्वर आपको इसलिए आशीष देता है ताकि आप:

  • जरूरतमंदों की मदद करें,

  • सुसमाचार का कार्य समर्थन करें,

  • और अपने जीवन से परमेश्वर की महिमा प्रकट करें।

📖 3 यूहन्ना 1:2

“हे प्रियो, मैं यह चाहता हूँ कि जैसे तेरी आत्मा कुशल है, वैसे ही तू सब बातों में कुशल रहे और स्वस्थ रहे।”


💖 निष्कर्ष (Conclusion)

प्रिय जनो,
Discipline of Finance” केवल पैसों का नियम नहीं — यह आत्मिक आज्ञाकारिता का भाग है।
जब हम अपने वित्त को परमेश्वर के अधीन लाते हैं, तो हमारा जीवन एक गवाही (Testimony) बन जाता है।

💠 अनुशासन लाओ, आशीष पाओ।
💠 दशमांश दो, परमेश्वर के राज्य में निवेश करो।
💠 और अपने हर खर्च को आत्मिक दृष्टि से देखो — क्या यह परमेश्वर की महिमा लाता है?


🙏 प्रार्थना (Closing Prayer)

“हे प्रभु,
हमें सिखा कि हम अपने वित्तीय जीवन में अनुशासन लाएँ।
हमारे हाथों को आशीष दे ताकि हम तेरा कार्य आगे बढ़ाएँ।
हमें दशमांश और भेंट में विश्वासयोग्य बना,
और हमें ऐसा जीवन दे जो तेरे राज्य के लिए फलदायी हो।
यीशु मसीह के नाम में — आमेन।”

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